वास्तव में जीविका के निर्धारण के लिए दसवां भाव, दूसरा भाव और ग्यारहवें भाव के साथ लग्र पर विचार करना आवश्यक है आत्मा कारक बली ग्रह, दशम का स्वामी दूसरा और एकादश स्वामी, नवांश के स्वामी के आधार पर व्यवसाय का या नौकरी का निर्धारण किया जाता है यहाँ नौकरी के लिए छठा भाव महत्वपूर्ण है जिसका संबंध 2 और 6, 11 से होना अनिवार्य है
और व्यापार के लिए यह देखना आवश्यक है कि दशम का संबंध सप्तम भाव से बन रहा है या नहीं ? पूरे ग्रहों का विवेचन नवांश में आत्म कारक ग्रह, लग्न ,द्वितीय एकादश का सांगोपांग निर्णय करने के बाद ही आप किसी नतीजे पर पहुंच सकते हैं
आइये जानते है की कौन सा गृह आपको क्या दे सकता है